7- BIBIO KI ADALA BADLI KA KHEL

Thursday, August 6, 2009

बीवियों की अदला-बदली का मज़ेदार खेल
प्रेषक - राजेश कुमार

प्रिय मित्रों,

मैं राजेश, उम्र ३६ वर्ष, छत्तीसगढ़ का रहने वाला हूँ, तथा मैं अन्तर्वासना का पिछले २ सप्ताह से नियमित पाठक हूँ। इसे पढ़ने के बाद मुझे लगा कि मैं भी अपने साथ घटित कुछ सच्ची घटनाएँ आप लोगों के सम्मुख रखूँ, ताकि आप भी आनन्द ले सकें।

बात उन दिनों की है जब मेरी शादी को १० साल हो गए थे, और मैं और मेरी पत्नी रेखा, जिसकी उम्र इस समय ३३ साल है, जिसकी फिगर ३८-३०-३२ है, और वो देखने और चोदने में भी काफी सेक्सी है।

हम दोनों याहू मैसेन्जर पर नियमित रूप से चैटिंग कर ते हैं। हमें कैमरा लगाकर चुदाई करने और दूसरे युगल के साथ नंगे होकर चैटिंग करने का शौक लग गया था। चैट-रूम में कई जोड़े मिलते हैं, उन्हीं में से एक था अरुण, जो हमारी ही उम्र का था, उसकी पत्नी नीलम भी शानदार जिस्म की मालकिन थी। उसकी फिगर ३६-३२-३६ थी।

चैटिंग करते-करते बात मिलने तक पहुँच गई थी। हिम्मत करके हम उनके शहर पहुँच गए। हम पहली बार इस तरह के खेल के लिए आए थे, इसलिए हमें काफ़ी डर बी लग रहा था। हालाँकि मैंने रेखा को यह नहीं बताया था कि हम सेक्स करेंगे। उससे मैंने बस मिलने की बात कही थी, जिससे वह तैयार हो गई थी।

अब हम उनके साथ उनके शहर के बाहर स्थित फार्म-हाउस में थे। अरुण ने अपने नौकरों को छुट्टी देकर भगा दिया था। अब फार्म-हाउस में हम चारों ही थे। हमने थोड़ा नाश्ता किया। आपस में बातें करने लगे, बातें करते-करते सेक्सी मज़ाक भी करने लगे थे।

तभी मैंने अरुण से कहा, "यार मेरा मन नीलम भाभी को चोदने को कर रहा है।" यह सुनकर नीलम शरमा गई।

तभी अरुण ने कहा, "यार मेरा भी मन रेखा भाभी की चुदाई का कर रहा है, बल्कि मैं तो जब भी इसे कैमरे में देखता हूँ, तो उसे चोदने का मन करता है, और मेरा लण्ड फट से खड़ा हो जाता है। आज मुझे रेखा की चुदाई का मौका दो तो, तुम मेरी बीवी की जमकर चुदाई कर सकते हो। वैसे भी नीलम तुमसे चुदवाने के लिए बहुत दिनों से मरी जा रही है।"

मैंने रेखा से पूछा तो उसने अरुण से चुदवाने से साफ़ इन्कार कर दिया, "तुम नीलम की चुदाई करो, उसमें मुझे कोई समस्या नहीं है। मुझे नहीं चुदवाना है।"

फिर मैंने, अरुण, और नीलम तीनों ने मिलकर रेखा को समझाया कि आजकल सभी ऐसा करते हैं और फिर इसमें मज़ा भी बहुत आता है।

आख़िर में हमने रेखा को तैयार भी कर लिया और मैं नीलम के साथ एक कमरे में तथा रेखा अरुण के साथ दूसरे कमरे में चली गई।

इधर मैं नीलम को लेकर जैसे ही कमरे में गया, नीलम मेरे ऊपर टूट पड़ी। उसने मुझे ज़ोरों से पकड़ लिया और कहने लगी, "राज मैंने तुम-से साथ चुदवाने के लिए अरुण से कतनी ज़िद की है, तब जाकर यह मौक़ा आया है। अब आज तुम मेरी जमकर चुदाई करो। अरुण तो मुझे ठीक से चोद नहीं सकता है।"

मैंने कहा - "तुम चिन्ता मत करो। मैं तुम्हारी चूत का बारह बजा दूँगा।

मैंने नीलम को अरुण का लण्ड चूसते हुए बीसियों बार देखा था, और मेरा भी मन लण्ड चुसवाने को करता था, पर रेखा को यह पसन्द नहीं था। आज मेरी इच्छा पूरी होने की सम्भावना थी। इसलिए मैंने नीलम से जब लण्ड चूसने को कहा तो वह पल भर में तैयार हो गई और कहा, "मैं आज तुम्हारे लण्ड को ऐसा चूसूँगी कि तुम चुदाई से अधिक लण्ड चुसवाने में यकीन करोगे।"

वैसे अरुण ने भी मुझे बताया था कि नीलम जमकर लण्ड चूसती है, इसलिए जब भी हम मिलें तुम उससे अपना लण्ड ज़रूर चुसवाना। सो मैं आज अपनी मनोकामना पूरी होती देख बहुत खुश हो रहा था।

थोड़ी देर में हम दोनों नंगे हो गए थे, मैं उसकी बड़ी-बड़ी चूचियों को दबा रहा था, बीच-बीच में उसकी चूत में उँगली भी कर रहा था, जिससे नीलम काफी उत्तेजित हो गई थी। नीलम भी अपने एक हाथ से मेरे केले जैसे लण्ड से खेल रही थी। तभी अचानक उसने मेरे लण्ड की ओर अपना मुँह बढ़ाया, यह देखकर मुझे काफी मज़ा आया। अब नीलम मेरे लण्ड को धीरे-धीरे अपने मुँह में लेती जा रही थी और मुझे मस्ती से सराबोर करती जा रही थी। मैं आज पहली बार किसी पराई स्त्री के साथ कमरे में अकेला था और मेरा लण्ड उसके मुँह में था। नीलम भी पूरी तरह से मस्ती में आ गई थी और वह ज़ोर-ज़ोर से मेरे लण्ड को मुँह में अन्दर-बाहर कर रही थी।

उसकी लण्ड-चुसाई से मैं पूरी तरह मस्त हो गया था और पानी छोड़ने वाला था। मैंने नीलम को यह बताया तो उसने और भी ज़ोरों से चूसना शुरु कर दिया और थोड़ी ही देर में मेरा पानी उसके मुँह में गिर गया। नीलम ने बड़े प्यार से मुझे देखा और पूछा, "कैसा रहा? मज़ा आया?"

मैंने कहा, "बहुत मज़ा आया।"

"चलो अब तुम मुझे मज़ा दो, और मेरी जम कर चुदाई करो।"

थोड़ी ही देर में नीलम के प्रयास से मेरा लण्ड सावधान की मुद्रा में खड़ा हो गया, तब मैंने नीलम को नंगी हालत में अपनी गोद में उठा कर उसे चूमने लगा। वह जल्दी ही जोश में आ गई और मेरे लण्ड से खेलने लगी। अब मुझसे भी नहीं रहा जा रहा था। मैंने उसने नीचे लिटाकर उसकी चुदाई शुरु कर दी।

नीलम की इतनी चुदाई अरुण ने शायद कभी नहीं की थी, इसलिए वह बड़े मज़े से चुदवा रही थी। मैंने अब ज़ोर-ज़ोर से गाण्ड को हिला-हिला करक धक्के देने शुरु किए तो नीलम ने कहा, "हाँ... फाड़ डालो... इतना फाड़ डालो कि इसकी सिलाई ना हो सके..."

उसकी ऐसी बातें सुनकर मेरा जोश बढ़ता ही जा रहा था। तभी उसने कहा, "और ज़ोर से चोदो राजा.. मैं अब झड़ने वाली हूँ।

मैं अब ज़ोर-ज़ोर से अपना लण्ड नीलम की चूत के अन्दर-बाहर करने लगा था, तभी अचानक नीलम ने ज़ोर से मुझे अपनी ओर खींचा और अपनी आँखें बन्द कर लीं, और थोड़ी देर के लिए एकदम शान्त हो गई। मुझे पता चल गया कि वह अब झड़ चुकी है।

अब मैंने ज़ोर-ज़ोर से झटके दिए और थोड़ी देर में मेरा काम भी तमाम हो गया। अब हम दोनों अलग होकर एक-दूसरे को बड़े प्रेम-भाव व संतुष्टि भरी नज़रों से देख रहे थे। नीलम ने कहा, "आज पहली बार मेरा पानी गिरा है। नहीं तो अरुण जब भी करता है तो वह थोड़ी ही देर में खल्लास हो जाता है।"

साथियों इस कहानी में मैंने अपनी इस सच्ची घटना का एक ही पक्ष सुनाया है। दूसरा पक्ष जो मेरी बीवी के साथ हुआ, उसे अगली बार सुनाऊँगा...

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